Equity vs Mutual Fund – कौन सा विकल्प बेहतर होगा आपके लिए?

क्या आपको कंपनियों के शेयरों में सीधे निवेश करना चाहिए या म्यूचुअल फंड खरीदना चाहिए? कौन सा विकल्प आपके लिए ज्यादा बेहतर है? यही जानने की कोशिश करेंगे आज के पोस्ट Equity vs Mutual Fund in Hindi में।

बहुत सारे निवेशकों को लगता है कि उन्हें सीधे शेयरों में निवेश करना चाहिए, क्योंकि उन्हें यह पता नहीं होता कि दिन के अंत में म्यूचुअल फंड क्या करता है, हालांकि स्टॉक मार्केट में निवेश पूरी तरह से एक अलग खेल है और वहां Dynamics बहुत अलग हैं। आइए इसे एक-एक करके समझते है।

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Equity vs Mutual Fund in Hindi

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि शेयरों में निवेश करना उतना ही सरल है जितना कि हॉट टिप्स का उपयोग करके कुछ स्टॉक खरीदना और फिर अगले कुछ महीनों/वर्षों में उस स्टॉक से कई गुणा ज्यादा मुनाफा कमाने की प्रतीक्षा करना।

अनुभवी निवेशक जानते हैं कि कुछ भी सच्चाई से दूर नहीं है, वे जानते हैं कि कंपनी की बैलेंस शीट का रिसर्च करने और भविष्य के लिए सही शेयरों को चुनने के लिए बड़ी मात्रा में ज्ञान और विशेषज्ञता की जरुरत होती है। ऐसे कई निवेशक हैं जिन्होंने अपने पूरे जीवन का महत्वपूर्ण समय रिसर्च करने में लगाया है कि स्टॉक में निवेश कैसे करें और इसके बाद भी वे बड़ी गलतियाँ करते हैं।

दोस्तों, सीधे मतलब की बात करते है – शेयरों में Invest करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। सही शेयरों को लेने के लिए सालों की मेहनत और बहुत सारे ज्ञान की जरूरत होती है, इसके विपरीत जहां म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए आपको ज्यादा ज्ञान की जरूरत नहीं होती है।

म्यूचुअल फंड उन निवेशकों के लिए बनाया जाता है जो खुद स्टॉक निवेश पर रिसर्च करने के लिए ज्यादा समय नहीं दे सकते हैं। आप बस कुछ बुनियादी नियमों का उपयोग करके अच्छा म्यूचुअल फंड चुन सकते हैं या एक वित्तीय सलाहकार को Hire कर सकते हैं जो आपके लिए ऐसा कर सकता है।

No Control on Shares

जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आप यह Control नहीं कर सकते हैं कि कौन से शेयर समय-समय पर खरीदे जाये और बेचे जाये। वह फंड मैनेजर का काम है, आप केवल म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और अपने पैसे Professional Management को दे देते हैं। इसलिए आपके पास उन शेयरों पर कोई Control नहीं होता है जो फंड मैनेजर द्वारा चुने गए हैं।

हालाँकि जब आप Direct स्टॉक में निवेश करते हैं, तो आप खुद ही फंड मैनेजर होते हैं और इस पर आपका पूरा नियंत्रण होता है। इसलिए आपके रिसर्च, लॉजिक, हॉट टिप्स के आधार पर आप शेयरों को खरीद और बेच सकते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड के मामले में ऐसा नहीं है। जो व्यक्ति स्टॉक खरीदने और बेचने का निर्णय ले रहा है, वह एक पेशेवर (Professional) है जो इस खेल को जानता है।

Professional Fund Manager

हवाई जहाज को उड़ाने वाले एक पायलट और ऐसा करने वाले एक डॉक्टर के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि हवाई जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा यदि उसे एक डॉक्टर द्वारा नियंत्रित किया जाता है (जब तक कि वह हवाई जहाज उड़ाने की अतिरिक्त कला नहीं सीख लेता)।

Same चीज Equity Shares की खरीद बिक्री में भी होती है। एक म्यूचुअल फंड बहुत ही उच्च गुणवत्ता और पेशेवर फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है, जिसके पास Economy, Credit Cycle, Interest Rate Cycle, अर्थव्यवस्था, Fundamental Analysis, Taxation, व्यवसायों जैसी विभिन्न चीजों का ज्ञान होता है और विभिन्न स्तरों पर इक्विटी बाजारों के वर्षों का अनुभव है। वे फंड मैनेजमेंट से संबंधित व्यावसायिक अध्ययन पूरा किया होता है, तब जाकर उन्हें Fund Manager की नौकरी मिलती है।

जब वे खरीदने या बेचने के लिए किसी स्टॉक पर निर्णय लेते हैं, तो उन्हें उस क्षेत्र और उस व्यवसाय की बहुत गहरी समझ होती है। वे कंपनियों और उनके कारखानों का दौरा करते हैं, उनके शीर्ष प्रबंधन से मिलते हैं। कंपनियों के भीतर क्या चल रहा है, इस पर उन्हें कभी-कभी ज्ञान होता है और कभी नहीं भी होता है लेकिन किसी सामान्य व्यक्ति की तुलना में बेहतर तरीके से कंपनियों के भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं।

हालांकि, अधिकांश इक्विटी शेयरो के Investors को लगता है कि वे लम्बे समय के लिए महान Expertise के साथ Direct शेयरो में सफलतापूर्वक निवेश कर सकते हैं और एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर की तरह ही शानदार रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।

TCS या Infosys जैसी कंपनियों में एक शानदार केबिन में बैठा एक आईटी इंजीनियर निश्चित रूप से हॉट टिप्स के आधार पर कुछ स्टॉक खरीद सकता है, लेकिन एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर की Expertise से मेल नहीं खा सकता है, जो फंड हाउसों में करोड़ों की सैलरी कमाता है। और अगर वे उनकी Expertise मैच कर सकते हैं, तो क्यों न आप भी अपनी नौकरी छोड़ दें और मुंबई चले जाएं।

Market Volatility and Return

यह बहुत ही जरुरी Point है इसीलिए इसे अच्छे से समझे।

जब आप एक म्यूचुअल फंड खरीदते हैं, तो आप विभिन्न शेयरों के बहुत बड़े पोर्टफोलियो में निवेश कर रहे होते हैं, जिसकी रेंज में करीब 30-100 कंपनियां हो सकते हैं। इसलिए आपका लाभ और नुक्सान बड़ी संख्या में निवेश किये गए शेयरों पर निर्भर होता है, नुकसान होने पर जोखिम दूसरे शेयरों में divide कर दिया जाता है और उसी तरह से आपको मिलने वाला रिटर्न सभी का average होता है।

कम शब्दों में कहे तो किसी छोटे 4-10 स्टॉक वाले पोर्टफोलियो की तुलना में यहाँ कम जोखिम और कम रिटर्न capacity होता है। जब आप direct stock investor होते हैं, तो आप कितने स्टॉक खरीदेंगे, यह तय होता है आपके पोर्टफोलियो से कितना volatile रिटर्न है उसपर निर्भर करता है।

अधिकांश direct stock investor बहुत कम शेयरों पर दांव लगाते हैं, वे केवल 10-20 स्टॉक खरीदते हैं, कुछ तो केवल 2-3 पर ही सिमटे रहते है। इसलिए म्यूच्यूअल फंड में प्रत्येक स्टॉक का आकार पोर्टफोलियो में काफी बड़ा होता है और कोई भी परिवर्तन (up या down) सारे पोर्टफोलियो रिटर्न को प्रभावित करता है।

अधिकांश निवेशक बहुत अधिक रिटर्न या बहुत अधिक नुकसान को संभालने के लिए prepare नहीं होते हैं। यदि बहुत बड़ा रिटर्न होता है तो निवेशक अपने स्टॉक को बेच देते हैं और मुनाफे को lock करना चाहते हैं, ठीक उसी तरह अगर कुछ नुकसान होता है तब भी वे इसे बेचना चाहते हैं और जोखिम भरा खेल से बाहर निकल जाना चाहते हैं।

दोनों ही मामलों में, निवेशकों को खेल में बने रहने के बजाय बाहर निकलने और साइडलाइन पर इंतजार करने का फैसला महसूस होता है, क्योंकि बहुत ज्यादा फायदा या नुक्सान संभालने के लिए वे भावनात्मक रूप से तैयार नहीं होते है।

यही कारण है कि आपको मार्केट में कई ऐसे निवेशक मिलेंगे जिनके पास पिछले 10 साल से म्यूचुअल फंड है, लेकिन आपको बहुत कम ही ऐसा निवेशक मिलेगा जो पिछले 10 साल से एक ही स्टॉक रखता हो।

Systematic Investment Plan (SIP)

जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो इसमें SIP नामक Automatic निवेश करने की एक Standard Facility है। यह आपके निवेश को ऑटोमैटिक करने और नियमित निवेश की आदत बनाने का एक शानदार तरीका है। यह एक ऐसे Investor के लिए है, जो हर महीने एक निश्चित तारीख को एक निश्चित राशि का निवेश करना चाहता है।

हालांकि जब आप स्टॉक खरीदते हैं, तो आपको हर महीने प्रत्येक स्टॉक में मैन्युअल रूप से निवेश करना होगा यदि आप नियमित रूप से उनमें निवेश करना चाहते हैं। यह Practically रूप से चुनौतीपूर्ण और Inefficient हो जाता है क्योंकि इंसानी मन उसके डिजाइन के अनुसार आलसी है।

कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने Reminder सेट करते हैं और सफलता के कुछ महीनों के बाद आप कितने प्रतिबद्ध हैं, यह सभी 99% निवेशकों के लिए अलग हो जाता है। HDFC Securities जैसे कुछ पोर्टल्स ने अब SIP को इक्विटी में भी शुरू कर दिया है, इसलिए मैं जो कह रहा हूं वह सभी प्लेटफॉर्म पर लागू नहीं होता है।

80C Tax Benefits

Direct स्टॉक निवेश का कोई 80C Tax Benefit नहीं है, हालांकि यदि आप ELSS (Tax Saving Mutual Fund) में निवेश करते हैं, तो आप Taxation Benefits का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह एक छोटा सा कारण है कि आप सीधे शेयरों पर म्यूचुअल फंड को Priority दे सकते हैं।

Active v/s Passive Involvement

म्युचुअल फंड उन निवेशकों के लिए बनाया जाता है, जिनके पास शेयर मार्केट का कोई ज्ञान नहीं होता है और उनकी तरफ से कोई समय भी नहीं देना होता है। एक बार जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो समय के साथ फंड की देखरेख करने में आपकी भागीदारी बहुत सीमित होती है। किस शेयर को खरीदना है, कब खरीदना है इसके महत्वपूर्ण निर्णय फंड मैनेजर और उनकी 5-10 रिसर्च एनालिस्ट की विशेष टीम द्वारा ध्यान रखा जाता हैं।

हालांकि, यदि आप सीधे शेयरों में निवेश करने का निर्णय लेते हैं तो यह सब आपके द्वारा किया जाना है। भले ही यह आपके प्रतिदिन के कारोबार की तरह थकाऊ नहीं है, लेकिन फिर भी आपको कंपनियों पर रिसर्च करना है, आपके पोर्टफोलियो में प्रत्येक कंपनी के साथ क्या हो रहा है, इस पर नज़र रखें और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें (यह म्यूचुअल फंड के लिए भी लागू होती है)।

संक्षेप में, आपको direct स्टॉक निवेश में काफी सक्रिय होना होगा। जीवन में बहुत सारी चीजों की वजह से शेयर निवेश पर ध्यान देना कठिन हो जाता है।

Fees and Cost

जब आप Direct स्टॉक खरीदते हैं, तो आपको केवल STT के साथ Demat Account Charges और यदि कोई हो तो Transaction Charges देना होता है। लेकिन जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आपको कुछ Extra खर्च करना पड़ता है जिसे Expense Ratio कहा जाता है।

यह वह Charges है जो फंड के आधार पर दैनिक रूप से वसूला जाता है, हालांकि आप इसे खुद कभी नहीं देखते हैं। ये Charges इक्विटी म्यूचुअल फंड के लिए 2 से 2.5% की सीमा में हैं।

तो यह एक ऐसा Point है जहां Direct स्टॉक म्यूचुअल फंड से बेहतर हैं, लेकिन केवल तभी जब आप म्यूचुअल फंड की तरह ही Direct Stocks में रिटर्न प्राप्त कर सकें। यदि फंड मैनेजर आपके Wealth Creation प्रोसेस में आपके लिए Value Generate करने में सक्षम है तो फीस का पेमेंट करने में कोई बुराई नहीं है।

सीधे शेयरों में निवेश करना, सिर्फ इसलिए कि आप खर्च का अनुपात बचाएंगे। ये ठीक वैसा है जैसे कि आप एक खाने की डिश तैयार करते समय नमक पर पैसा खर्च करना नहीं चाहते, क्योंकि आप कुछ पैसे बचाएंगे।

इसके बजाय आपको उस डिश की अंतिम स्वाद पर फोकस करने की जरुरत है।

हालांकि यदि आप अपने दम पर सफल Direct Stocks में निवेश कर सकते हैं, तो म्यूचुअल फंड के माध्यम से निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।

Emotional Bias

आपकी Creation हमेशा आपके लिए विशेष होती है और इसलिए आप जो भी Research और Study करते हैं, उसके आधार पर एक शेयर खरीदते हैं तो बाद में यह स्वीकार करना बहुत मुश्किल हो जाता है कि आप गलत थे। आप अपने खरीद निर्णय के बारे में बहुत Emotional हो जाएंगे और सही समय पर नहीं बेचेंगे।

यह स्वीकार करना बहुत कठिन हो जाता है कि आप स्टॉक खरीद के निर्णय पर विश्वास करने के लिए अपने अतीत में बेवकूफ थे और सही समय आने पर नहीं बेचेंगे।

यही कारण है कि खराब इक्विटी निवेशक Long Term निवेशक बन जाते हैं। वे कई वर्षों तक खराब निवेश के साथ रहते हैं और अंततः Lose कर जाते हैं। यह आपका पैसा है और आपका Decision है।

इसके विपरीत जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो सभी निर्णय एक Professional द्वारा लिए जाते हैं जो अपने परफॉरमेंस के लिए वेतन कमा रहे हैं। वे तर्क के आधार पर निर्णय लेते हैं और भावनाओं को अपने सिस्टम से बाहर रखते हैं। यदि उनकी प्रक्रिया Sell कहती है, तो वे उसे बेचते हैं और अगर Buy कहता है, तभी वे किसी शेयर को खरीदते हैं।

ये है भारत के कुछ बड़े म्यूच्यूअल फंड्स जहाँ आप निवेश कर सकते है।

Conclusion

अंत में, शेयरों के साथ और म्यूचुअल फंड के साथ सीधे जाने के कुछ लाभ हैं तो कुछ नुक्सान भी है। हालाँकि, डायरेक्ट स्टॉक निवेश एक विशेष खेल है और यह सभी के लिए “चाय का प्याला” नहीं है। उन निवेशकों के लिए, जो अपने Wealth Creation के साथ थोड़ा सुरक्षित खेलना चाहते हैं, उन्हें अपने पैसो को सीधे इक्विटी में जलाने के बजाय म्यूचुअल फंड का विकल्प अपनाना चाहिए।

मैं यह बताना चाहूंगा कि कुछ मामलों में, Direct Stocks वास्तव में म्यूचुअल फंड से बेहतर हैं, लेकिन सामान्य लोगों के लिए म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हैं, जहाँ यह Long term Wealth Creation के लिए सफल है।

अगर आपको इस ब्लॉग पोस्ट Equity vs Mutual Fund in Hindi से कुछ भी नया सिखने को मिला तो इसे अपने दोस्तों के साथ Share जरूर करे जो स्टॉक मार्केट या म्यूच्यूअल फंड में निवेश करने की सोच रहे है, हो सकता है मेरी इस कोशिश से उनकी कुछ सहायता हो। Share करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद्..

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